प्रतीकों की उत्पत्ति बौद्ध संस्कृति की देन हैं

सही मायने में अगर देखा जाए तो प्रतीकों की उत्पत्ति बौद्ध संस्कृति की देन हैं

गजलक्ष्मी जिसे कहते हैं वह असलियत मैं महामाया का शिल्प हैं जब वह गर्भवती थी और अपने मायके जाने के पहले उसका अभिषेक किया गया था. इसीको बाद में यहां के पुरातत्त्वविद ने गजलक्ष्मी कहना शुरू किया. यह शिल्प अनेक बौद्ध गुफाओं में पाए जाते हैं



Atul Bhosekar.