यह इस समय की एक अजीब त्रासदी है कि जब सत्ता और कारपोरेट की अपवित्र जुगलबन्दियों के खिलाफ, श्रमिकों, किसानों और छात्रों के हितों के लिये आंदोलनों की सबसे अधिक जरूरत है
असंवेदनशील मध्यम वर्ग और किसान ----------------------------------------------- जिन्हें अपना पेंशन खत्म होने की कसक तो है लेकिन विरोध करने का माद्दा नहीं, जिन्हें बेहद ऊंची दरों पर टैक्स भरने में खिन्नता तो घेरती है लेकिन 'देश के लिये' चुप रहना ही एकमात्र विकल्प लगता है, जो बच्चों की…
सांसद निधि की  राशि को डकार गए  सरपंच सचिव 
देवखोह-आदिवासी अंचल तामिया के ग्राम पंचायत बोदल कछार के ग्राम देवखोह में पंचायत द्वारा ₹100000 की राशि से सांसद निधि द्वारा स्वीकृत सामुदायिक भवन का निर्माण कार्य प्रारंभ है जिसमें ₹85631 का बिल का फ़र्जी  भुगतान पंचायत द्वारा  किया जा चुका है मंदिर समिति द्वारापहले से ही इस स्थान पर बीम कालम का निर…
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हिन्दुस्तानी मधुमक्खियों को बेरोजगार करने की साजिश का भांडाफोड़..
देश में आयुर्वेदिक दवाईयां बनाने वाली कंपनियों के अलावा दर्जनों दूसरी कंपनियां शहद बेचती हैं। शहद कारखाने में तो बन नहीं सकता इसलिए वह गांव-जंगल में बसे हुए असंगठित लोगों से होकर इन कंपनियों तक पहुंचता है या मधुमक्खी पालकों के माध्यम से आता है। देश की सबसे बड़ी पर्यावरण-संस्था सीएसई ने अभी एक बड़ी…
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अंततः कोविड 19 का वैक्सीन खोज लिया गया है
क्या ख़ुश होने का वक़्त आ गया है ? पिछले एक साल में दुनिया के लाखों लोगों को खो देने के बाद अंततः कोविड 19 का वैक्सीन खोज लिया गया है। अमेरिका, रूस, चीन और इंग्लैंड में इसी सप्ताह टीकाकरण की शुरुआत होने जा रही है। भारत में भी यह प्रक्रिया अगले एक माह में शुरू होने की उम्मीद है। क्या वैक्सीन …
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सरकार का इरादा शुरू से नेक होता तो तालाबंदी का लाभ उठा कर अध्यादेश के ज़रिए क़ानून नहीं लाती
किसान आंदोलन के केंद्र में तीन क़ानून हैं। इनमें से एक है कांट्रेक्ट फ़ार्मिंग का क़ानून। इसके प्रावधानों को ठीक से समझने की ज़रूरत है। विवाद होने पर न्याय की व्यवस्था अदालत से अलग कर दी गई है। किसान को एस डी एम के कोर्ट में जाना होगा। अब डी एम और एस डी एम कोरपोरेट के दबाव में काम नहीं करेंगे इसे …
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एक मालिक बनना चाहता हूं मैं -
शहर जाने के लिए गांव छोड़ा था मैंने अब गांव लौटने के लिए शहर छोड़ना चाहता हूँ मैं । थक गया हूँ इस धोखे की दुनिया से भागमभाग नहीं पल सुकूँ का थोड़ा चाहता हूं मैं। माना कभी हठ थी मेरी लेकिन ऐ शहर अब रुकने की ज़िद न कर यहाँ से भाग जाना चाहता हूँ मैं । मंज़िलों वाले चकाचौंध ऊंचाइयो…
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