पिछोडी में 7 दिन क्रमिक अनशन जारी अवल्दा में 5 दिन क्रमिक अनशन जारी है।


                                    सरदार सरोवर बांध का जलस्तर बढते जा रहा है।
बिना पुनर्वास डूब मंजूर नहीं।
बगुद में मशाल रैली निकाली गई थी।


सरदार सरोवर परियोजना से बडवानी जिले के 65 गांवों प्रभावित है, इसका आज तक नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के द्वारा पुनर्वास नहीं किया गया है। इन गांवों में डूब आ चुका है जैसे भादल, कोटबांधनी, तुवरखेडा, करी, धजारा, बोरखेडी, कुली, घोगसा, मोरकट्टा, बिजासन, भवती, अमलाली, अवल्दा, जांगरवा, पिछोडी, नंदगाव, जामदा, पेण्ड्रा, राजघाट, कुकरा, भीलखेडा, कसरावद, इत्यादि गांवों में डूब आ चुकी है, इनका संपूर्ण पुनर्वास नहीं हुआ है।


राजघाट कुकरा में 17 परिवार टापू में रह रहे है, जिनका आज तक कानूनी पुनर्वास नहीं हुआ है इसके मुखियों को गुजरात राज्य में जमीन आबंटित की गई है, जो खराब होने के कारण यह विस्थापित अस्वीकार करते है, इसको 2017 में बेक वाटर लेवल से बाहर कर दिया गया था, कि आप लोग डूब में नहीं आते है, पिछले साल 2019 में इन परिवारांे को जबरती अस्थाई टीनशेड में लेकर गये थे, इसमें राजस्व विभाग के अधिकारीयों के द्वारा पंचनामा बना कर दिया गया था। परन्तु उस पंचनामें का आज तक कोई भी निर्णय नहीं लिया गया है। इसके वयस्क पुत्रों को मकान बनाने के लिए 5.80 लाख रू एवं आवासीय भूखण्ड की पात्रता आती है, जो आज तक नहीं दी गई है। आज भी 17 परिवार के विस्थापित परिवार मूलगांव में डटे हुए है एक साल से बिजली, मूलभूत सुविधाएं भी नहीं है, इसके बावजूद रहना पड रहा है।


हमारे गांव का कानूनी पुनर्वास नहीं हुआ है। बिना पुनर्वास डूब मंजूर नहीं। आज भी हमारे गांव में पिछले साल 2019 में सैकडो पंचनामें बनाये गये थे, परन्तु उन पंचनामों का आज तक निर्णय नहीं लिया गया है, फिर से एक बार डूब आ रही है। जो डूब गैरकानूनी है। आज भी अवल्दा में सैकडो परिवारों को मकान बनाने के लिए 5.80 लाख रू मिलना बाकी है। कई सारे परिवारों को जमीन के बदले 60 लाख रू मिलना बाकी है। कई सारे परिवारों को आवासीय भूखण्ड भी मिलना बाकी है। हमारे गांव को बेक वाटर लेवल से बाहर किया गया है, जो गैरकानूनी तरीके से गलत है, उसमें से तीन मकान डूब चुके थे, नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के बेक वाॅटर लेवल की गडबडी बहुत हुई है।


पिछोडी में 7 दिन भी क्रमिक अनशन जारी है। आज भी मछुआरों को मछली का अधिकार नहीं दिया गया है। पंजीयन करके एक सोसायटी बना दी गई है, परन्तु महासंघ आज तक नहीं बनाया गया है। मछुआरों को आजीविका का साधन आज तक नहीं दिया गया है। आज भी सैकडों परिवारों को मकान बनाने के लिए 5.80 लाख रू मिलना बाकी है। सैकडों परिवारों को आवासीय भूखण्ड मिलना बाकी है। सैकडो परिवारोे के द्वारा घर प्लाॅट के बदले नगदराशी ली गई है, ऐसे परिवारों को मध्यप्रदेश के आदेश 05 जून 2017 के अनुसार 180 वर्गमीटर के आवासीय भूखण्ड देना बाकी है। आज भी सैकडो परिवारों को राज्य की पुनर्वास नीति के अनुसार आजीविका अनुदान मिलना बाकी है, पुनर्वास अनुदान परिवहन अनुदान भी मिलना बाकी है। हमारे गाँव को बेक वाटर लेवल से बाहर किया गया था परंतु आज संपूर्ण पुनर्वास नही हुआ हैं।
बगुद कल शाम को मशाल रैली निकाली गई थी। हमारे गाँव का भी कानूनी पुनर्वास नहीं हुआ है हमारे गांव में सैकड़ों परिवारों का मकान बनाने के लिए 5.80 लाख रु मिलना बाकी हैं। आवसीय भूखण्ड भी मिलना बाकी है, आजीविका अनुदान, पुनर्वास अनुदान, परिवहन अनुदान मिलना बाकी है।


आज भी नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के द्वारा नर्मदा ट्रिब्यूनल फैसला, सर्वोच्च अदालत फैसले 2000,2005,2017 एवं राज्य की पुनर्वास नीति के अनुसार एवं नर्मदा घाटी विकास विभाग के आदेश 05 जून 2017 से 2019 के तहत कई सारे आदेशों का अमल करवाना बाकी है।


कनक सिंह दरबार, धनराज अवास्या, गेदालाल भाई, राहुल यादव, सेवन्तीबाई, हरे सिह दरबार
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