जोड़-तोड़ की कोशिश मध्य प्रदेश में तेज,

भोपाल
मध्य प्रदेश में एक दिन पहले तक माना जा रहा था कि कमलनाथ सरकार ने डैमेज कंट्रोल कर लिया है। खुद कांग्रेस के नेता इस बात का दावा कर रहे थे लेकिन गुरुवार शाम को कांग्रेस विधायक हरदीप डंग के इस्तीफा ने हालात फिर से बदल दिए हैं। हरदीप डंग ने मुख्यमंत्री कमलनाथ को भी अपना इस्तीफा भेजा है, हालांकि अभी मंजूर नहीं हुआ है। वहीं कांग्रेस के तीन और विधायक अभी लापता बताए जा रहे हैं। डंग के साथ बेंगलुरु भेजे गए कांग्रेस के अन्य विधायक बिसाहूलाल सिंह, रघुराज कंसाना और निर्दलीय विधायक सुरेंद्र सिंह शेरा गुरुवार से भोपाल नहीं लौटे हैं।अगर बाकी तीन विधायक भी कांग्रेस का साथ छोड़ देते हैं तो कमलनाथ सरकार पर खतरा मंडराने लगेगा। रूठे विधायकों को मनाने के लिए मध्य प्रदेश में कैबिनेट विस्तार की भी चर्चा तेज हो गई है जिसमें कुछ विधायकों को मंत्री बनाया जा सकता है।


 विधानसभा का गणित क्या कहता -क्‍या कहता है विधानसभा का आंकड़ा?
मध्‍य प्रदेश में कुल 230 विधानसभा सीटें हैं लेकिन विधायकों के निधन के बाद दो सीटें अभी खाली हैं। उस लिहाज से बहुमत का आंकड़ा 115 है। कांग्रेस के पास अभी 114 विधायक हैं। अगर हरदीप का इस्तीफा स्वीकार हो जाता है तो कांग्रेस के पास महज 113 सदस्य बचेंगे। कांग्रेस को इसके अलावा 4 निर्दलीय विधायक, 2 बीएसपी (एक पार्टी से निलंबित) और एक एसपी विधायक का भी समर्थन मिला हुआ है। इस तरह कांग्रेस को फिलहाल 120 विधायकों का साथ माना जाएगा।


115 के जादुई आंकड़े पर पहुंच सकती है बीजेपी
कांग्रेस के दो विधायक बेंगलुरु में हैं। अगर दोनों कांग्रेस का साथ छोड़ देते हैं तो संख्याबल घटकर 111 रह जाएगा। वहीं बीजेपी के पास 107 विधायक हैं। अगर बीजेपी को ये चार विधायक समर्थन दे देते हैं तो बीजेपी के पास 111 विधायक हो जाएंगे। बीजेपी अपने और अन्य के समर्थन से 115 तक पहुंच सकती है।

संकट से उबरने के लिए कमलनाथ करेंगे मंत्रिमंडल विस्तार
संकट से उबरने के लिए सीएम कमलनाथ मंत्रिमंडल विस्तार का फॉर्म्युला ला सकते हैं। मौजूदा हालातों में पूरी कमान कमलनाथ और दिग्विजय सिंह ने अपने हाथ में ले ली है। मुख्यमंत्री निवास रणनीति का केंद्र है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल, गुलाम नबी आजाद और कपिल सिब्बल उन्हें मदद करते हैं। कमलनाथ की दूसरी रणनीति बीजेपी के विधायक तोड़ने की है।


बीजेपी विधायकों को तोड़ने की कोशिश
ऐसी अटकलें हैं कि एक या दो और बीजेपी विधायक सीएम आवास में देखे गए हैं। रात को करीब 1 बजे बीजेपी विधायक संजय पाठक को सीएम आवास से निकलते देखे गए। त्रिपाठी के सीएम आवास पहुंचने से पहले राज्‍य सरकार में मंत्री गोविंद सिंह ने घोषणा की कि दो बीजेपी विधायक रात में कांग्रेस जॉइन करेंगे। इसके बाद ऐसी अटकलें शुरू हो गईं कि बीजेपी विधायक शरद कोल दूसरे विधायक हो सकते हैं लेकिन वह सीएम आवास में नहीं देखे गए।


मध्‍य प्रदेश में कांग्रेस और बीजेपी के बीच विधायकों को तोड़ने की कोशिश गुरुवार रात को सियासी युद्ध में तब्‍दील हो गई। शाम को कांग्रेस के एक 'लापता' विधायक ने इस्‍तीफा दे दिया। इसके ठीक बाद बीजेपी के दो विधायक सीएम कमलनाथ के सरकारी आवास पहुंच गए। विधायकों को अपने पाले लाने के लिए रातभर चली जंग से अब कांग्रेस और बीजेपी दोनों की ही टेंशन काफी बढ़ गई है।डंग के साथ बेंगलुरु भेजे गए कांग्रेस के अन्‍य विधायक बिसाहूलाल सिंह, रघुराज सिंह कंषाना और निर्दलीय विधायक सुरेंद्र सिंह शेरा गुरुवार से भोपाल नहीं लौटे हैं। माना जा रहा है कि आज कांग्रेस के कुछ और विधायक इस्‍तीफा दे सकते हैं। अगर ये विधायक इस्‍तीफा देते हैं तो कमलनाथ सरकार संकट में घिर जाएगी। विधायकों के तेवर से साफ नजर आ रहा है कि वे झुकने के मूड में नहीं हैं। अगर ऐसा होता है कमलनाथ सरकार का विधानसभा में संख्‍याबल गड़बड़ा सकता है।

संकट में घिरे कमलनाथ ने रातों-रात बदला डीजीपी
कमलनाथ सरकार पर आए इस संकट का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि आनन-फानन में राज्‍य के डीजीपी को बदल दिया गया। डीजीपी वीके सिंह की जगह पर विवेक जौहरी को राज्‍य का नया डीजीपी बनाया गया है। उधर, एसपी और बीएसपी के विधायकों ने भी कांग्रेस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्‍होंने कांग्रेस को अपने बयानों पर लगाम लगाने की चेतावनी दी है।इससे पहले गुरुवार रात 8 बजे सत्‍तारूढ़ कांग्रेस के 4 'लापता' विधायकों में शामिल हरदीप सिंह डंग ने इस्‍तीफा दे दिया। इसके बाद कांग्रेस ने भी पलटवार किया। बीजेपी के बागी विधायक नारायण त्रिपाठी सीएम कमलनाथ के घर पहुंच गए। त्रिपाठी ने इसके बाद स्‍पीकर से भी मुलाकात की। पहले ऐसी अफवाह थी कि बीजेपी विधायक ने इस्‍तीफा दे दिया है लेकिन उन्‍होंने कहा कि अपने 'विधानसभा क्षेत्र के विकास' के लिए उन्‍होंने सीएम से मुलाकात की है।
ऐसी अटकलें हैं कि एक या दो और बीजेपी विधायक सीएम आवास में देखे गए हैं। रात को करीब 1 बजे बीजेपी विधायक संजय पाठक को सीएम आवास से निकलते देखे गए। त्रिपाठी के सीएम आवास पहुंचने से पहले राज्‍य सरकार में मंत्री गोविंद सिंह ने घोषणा की कि दो बीजेपी विधायक रात में कांग्रेस जॉइन करेंगे। इसके बाद ऐसी अटकलें शुरू हो गईं कि बीजेपी विधायक शरद कोल दूसरे विधायक हो सकते हैं लेकिन वह सीएम आवास में नहीं देखे गए।
सूत्रों के मुताबिक ठीक इसी समय बीजेपी नेता शिवराज सिंह चौहान और नरेंद्र सिंह तोमर नई दिल्‍ली में बीजेपी अध्‍यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात करते देखे गए। देर रात तक कांग्रेस के दो 'लापता' विधायकों बिसाहूलाल स‍िंह और रघुराज सिंह कंसाना और निर्दलीय विधायक सुरेंद्र सिंह शेरा की ओर से चुप्‍पी छाई रही। माना जा रहा है कि डंग के साथ ये तीनों ही विधायक बेंगलुरु में हैं। इससे पहले मंदसौर की सुवसरा विधानसभा सीट से कांग्रेस के विधायक हरदीप सिंह डंग ने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया।
विधायक डंग के इस्‍तीफे के बाद कांग्रेस सकते में आ गई। अपने इस्तीफे की चिट्ठी में हरदीप सिंह डंग ने लिखा है कि वह कमलनाथ, ज्योतिरादित्य सिंधिया या दिग्वजिय सिंह, किसी के भी खेमे के नहीं हैं इसलिए परेशान होते हैं। हरदीप सिंह डंग ने मंत्री पद ना दिए जाने पर भी नाराजगी जताई। डंग ने लिखा, 'बड़ी उम्मीद से जनता ने मुझे विधायक बनाकर भेजा लेकिन लगातार मेरी उपेक्षा की जा रही है। कोई भी मंत्री काम करने को तैयार नहीं है। जनता को योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है और बजट का बहाना बताया जा रहा है। जबकि दूसरे क्षेत्रों में काम हो रहे हैं।' उधर, सीएम कमलनाथ ने कहा कि डंग उनकी पार्टी के सदस्‍य हैं लेकिन उन्‍हें अभी इस्‍तीफा नहीं मिला है। मैं उनसे निजी तौर पर बात करुंगा या मुलाकात करुंगा।
सरकार बचाने के लिए कांग्रेस की रणनीति
कमलनाथ सरकार को बचाने के लिए कांग्रेस पार्टी एक फॉर्म्‍युले पर काम कर रही है। इसके तहत जल्‍द ही मंत्रिमंडल का विस्‍तार किया जा सकता है। पूरे संकट को सुलझाने के लिए कमान खुद सीएम कमलनाथ और पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने संभाल ली है। कांग्रेस के नेता गुलाम नबी आजाद और कपिल सिब्‍बल भी बीजेपी के इस दांव को फेल करने में लग गए हैं। कांग्रेस की रणनीति है कि विधायकों के विश्‍वास को बनाए रखा जाए और बीजेपी के विधायकों को तोड़ा जाए। कांग्रेस की कोशिश है कि बीजेपी किसी भी तरह से 8 विधायकों को न तोड़ सके। निर्दलीयों से कहा जा रहा है कि वे जो मांगेंगे, उन्‍हें तत्‍काल मिलेगा। यही नहीं निर्दलीय विधायकों को मंत्री भी बनाया जा सकता है। संभावना है कि जल्‍द ही प्रदेश कांग्रेस अध्‍यक्ष की भी नियुक्ति कर दी जाए जिसके लिए ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया प्रयासरत हैं।
 'कर्नाटक फॉर्म्‍युले' पर बीजेपी कोभरोसा
मध्‍य प्रदेश में बीजेपी 'कर्नाटक फॉर्म्‍युले' पर काम कर रही है। इसके तहत उसकी कोशिश कांग्रेस के विधायकों को कम करने पर है। बताया जा रहा है कि यह पूरा अभियान दिल्‍ली में जेपी नड्डा के नेतृत्‍व में चल रहा है। इस 'ऑपरेशन लोटस' में शिवराज सिंह, नरेंद्र सिंह तोमर, धर्मेंद प्रधान, वीडी शर्मा, नरोत्‍तम अरविंद मेनन शामिल हैं। जिन विधायकों को कर्नाटक के बेंगलुरु में ठहराया गया है, उन्‍हें संभालने का काम बीएस येदियुरप्‍पा के बेटे को दिया गया है।

 मध्‍य प्रदेश की सत्‍ता का गणित
 देश का दिल कहे जाने वाले मध्‍य प्रदेश में कुल 230 विधायक हैं। दो सीटें अभी खाली हैं। बहुमत का आंकड़ा 115 है। अभी कांग्रेस के पास 114 विधायक हैं। इसके अलावा 4 निर्दलीय विधायक, 2 बीएसपी (एक पार्टी से निलंबित) और एक एसपी विधायक का भी समर्थन मिला हुआ है। इस तरह कांग्रेस को फिलहाल 121 विधायकों का साथ है। अगर कांग्रेस पार्टी के 8 विधायक इस्‍तीफा देते हैं तो उसकी संख्‍या घटकर 108 हो जाएगी। वहीं बीजेपी के पास 107 विधायक हैं। बहुमत का आंकड़ा 116 है। बीजेपी के पास अभी 107 विधायक हैं लेकिन अगर नारायण त्रिपाठी और शरद कोल कांग्रेस में शामिल हो जाते हैं तो भगवा पार्टी के केवल 105 विधायक रह जाएंगे। इस तरह कांग्रेस के 106 विधायक और बीजेपी के 105 विधायक हो जाएंगे।