Covid- 19 कोरोना-भय से उपजी समानता

कोरोना वायरस से उपजी इस विश्वव्यापी दहशत का सबसे बड़ा कारण है, इसका इलाज उपलब्ध न होना। यह वायरस धर्म, जाति, भाषा, क्षेत्र, अमीरी-गरीबी, नस्ल, रंग और अन्य भेदभाव जिसके कारण लोग लड़ मरते हैं, कोई फर्क नही करता औऱ फिलहाल यह सबको मार सकता है। पिछले दो महीनों में चीन, इटली और ईरान सहित जितने देशों में कोरोना से लगभग 5000 मौतें हुईं हैं, इतने भारत मे सड़क दुर्घटनाओं में मारे जाते हैं। सीवर की सफाई, बीमारियों, आत्महत्याओं, हत्याओं, धार्मिक संघर्षों और युद्धों में न जाने कितने लोग मारे जाते हैं। मुझे नही लगता कोरोना उसकी बराबरी कर सकेगा।



दुनिया में बहुत से लोग नफरत के कारण दूसरों की मृत्यु को जायज मानते रहे हैं। वे नफरती जो जानते हैं कि वे सुरक्षित हैं, उनमें दूसरों को मिटा देने में हिचक का भाव नही रहता। वहीं दूसरी ओर जिन्हें मनुष्यता, समानता और प्रेम में विश्वास है, वे दुनिया के हर दुख और तकलीफ को कम करने का प्रयास करते हैं, उसपर अपनी चिंता करते हैं। कोरोना के साथ नई बात यह हुई कि इस वायरस की चपेट में दुनिया के ज्यादा सुरक्षित लोग, विकसित लोग आए हैं और इसलिए यह समस्या बहुत बड़ी है। इटली ने दो लाख करोड़ रुपये का बजट रखा है इससे निपटने के लिए। यहीं इसका इलाज महंगा भी रहता तो कोरोना की इतनी इज्जत अफ़जाई नही होती। दुनिया का दुख अमीरों के दुख से नापा जाता है। मालिक का जुकाम नौकर के मलेरिया से हमेशा बड़ा रहा है। पर कोरोना ने सबको बता दिया है कि जिन बातों पर इंसान ने तमाम भेद पैदा कर रखे हैं, वे सारे गैर कुदरतन है।


कोरोना निश्चित ही एक खतरनाक वायरस है पर जितना हल्ला है, उतना है नही। इससे बचने के लिए जो जरूरी उपाय बताए जा रहे हैं, वे जरूर अपनाए जाएं। हर सर्दी खांसी बुखार कोरोना के कारण नही है। सरकारों को चाहिए, इसके परीक्षण केंद्र ज्यादा से ज्यादा खोले जाएं। अगर कोरोना के अधिक तापमान में खत्म होने की बात सही है तो दक्षिण एशिया की भीषण गर्मी इसका इंतजार कर रही है। इससे ज्यादा घबराएं नही। आप देख रहे होंगे रिपोर्ट्स में कि जिन्हें इसका संक्रमण हुआ है, उनमे ज्यादातर लोग ठीक हो गए हैं। इस तरह की विपत्तियों के पीछे ज्यादातर मामलों में मनुष्य का अप्राकृतिक कार्य रहा है और प्रकृति अपना बदला जब चुकाती है, तब उसे संभालना मुश्किल होता है। कोरोना रहे या न रहे, संसार नश्वर है इसलिए जो जीवन मिला है, उसमें प्रेम, आनंद, सहयोग, अहिंसा, बराबरी आदि को स्थापित करके जिया जाना चाहिए। हम सब एक हैं, यह कोरोना ने सिद्ध कर दिया है।


@ पीयूष कुमार Piyush Kumar