निलंबन के बाद धरने पर बैठे सांसदों के लिए सुबह-सुबह चाय लेकर पहुंचे राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश।

निलंबन के बाद धरने पर बैठे सांसदों के लिए सुबह-सुबह चाय लेकर पहुंचे राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश। अब उपवास भी करेंगे एक दिन का। लेकिन गांधीगिरी और उपवास का कोई मतलब तभी बनता है जब आप सच के साथ खड़े हों। छल-छद्म से किसान विरोधी बिल पास कराने के बाद उपवास पर बैठें भी तो क्या!
हरिवंश जी एक समय मेरे लिए भी प्रेरणा स्रोत हुआ करते थे। बाद में धीरे-धीरे उनके फैसलों से सहमत होना कठिन होता गया। मगर अब तो बात सहमति असहमति से आगे चली गई। जैसे भी बने हों, उपसभापति बन जाने के बाद उस पद की गरिमा बनाए रखना उनकी जिम्मेदारी थी। लोकसभा अध्यक्ष पद स्वीकार करने के बाद सोमनाथ चटर्जी ने दलीय और वैचारिक प्रतिबद्धता से ऊपर उठकर और जीवन के आखिरी दिनों में बहिष्कार जैसी स्थिति झेलकर भी यह दिखाया कि पद की गरिमा का निर्वाह कैसे किया जाता है। आप इसमें बुरी तरह नाकाम रहे। अफसोस!


Pranava Priyadarshee