1 रुपये की अवमानना तो मानहानि भी सवा रुपये की हो


रोहिणी सिंह ने जय शाह को लेकर वायर में रिपोर्ट की थी। तब इस रिपोर्ट के कारण उन पर मानहानि का केस हो गया था। उस दौरान राहुल गांधी पर भी संघ की मानहानि का केस चल रहा था। मानहानि को लेकर जयपुर में एक लेक्चर दिया।


एक मान, एक हानि
एक राष्ट्र, एक मान
सवा रुपये का सबका सम्मान



प्रशांत भूषण के केस में सुप्रीम कोर्ट ने एक रुपए का जुर्माना दिया है। कई पाठकों ने याद दिलाया कि कोर्ट ने मेरा प्रस्ताव मान लिया है। कोर्ट के पास शायद ही यह किताब पहुंची होगी तो मेरा प्रस्ताव कैसे माना गया? संयोग हो सकता है। वाकई मानहानि की अवधारणा बेहद सामंती है। बेशक कोर्ट रोक लगाए। राहत दे। लेकिन किसी पर आप करोड़ों की मानहानि लगा दे यह सही नहीं है। इससे होता यह है कि कई बड़ी कंपनियां इसका डर दिखा कर रिपोर्ट रुकवा देती हैं। अब एक रिपोर्ट के लिए कोई कहां से 100 करोड़ भरेगा। तो कई पत्रकार रिपोर्ट ही नहीं करते हैं। मानहानि का सारा ड्रामा इन्हीं ताकतवरों को बचाने के लिए है। जबकि होना यह चाहिए कि जब कोई पत्रकार दावा करे कि उसकी रिपोर्ट सही है तब कोर्ट को जांच का आदेश देना चाहिए। सारे दस्तावेज़ मंगाने चाहिए। कंपनी की तरफ से। लेकिन इसकी जगह कंपनियों के महंगे वकील मानहानि का नोटिस भेज डरा देते हैं। रोक लगा देते हैं। एनि वे।


मेरी किताब बोलना ही है में इस पर एक पूरा चैप्टर है। अग्रेज़ी में यही किताब the free voice के नाम से छपी है जिसे स्पीकिंग टाइगर्स ने छापा है।
https://rajkamalbooks.wordpress.com/…/bolnahihairavishkuma…/













ravish kumar