अक्षर-अक्षर पढ़ सकूं।  सागर रूपी किताब से- विश्व पुस्तक दिवस

विश्व पुस्तक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं! 
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सांस के अंतिम पहर तक
साथ  तेरा चाहिए।
बुझ जाए दीये की लौ
तो,जुगनुओं की रौशनी में
अक्षर-अक्षर पढ़ सकूं।
 सागर रूपी किताब से
 चुन-चुन कर मोती प्रेम का
 यहां-वहां बिखड़ा सकूं।
 ज़िंदगी धूप बनकर 
 झुलसा न पाए ये जहां
 लालसा है बस यही
 सांस के अंतिम पहर तक
 साथ तेरा चाहिए।


 ज्ञान ऐसा मिल सके
 मनुष्य की मनुष्यता
 बची रहे मनुष्य में।
 बैर-भाव मिट सके
 व्यापार ना हो प्रेम का।
 ऊंच-नीच,जाति,धर्म के
 बीच का दीवार गिर सके।
 धरा दीर्घ काल तक
 मुस्कुराती ही रहे। 
आकाश की नमी
 ब्रह्मांड में बची रहे।
 सांस के अंतिम पहर तक 
 साथ तेरा चाहिए।


डाॅ.चित्रलेखा