वो आदमी नहीं है मुकम्मल बयान है-दुष्यंत कुमार

कल नुमाइश में मिला वो चीथड़े पहने हुए,
मैंने पूछा नाम तो बोला कि हिन्दुस्तान है।


मुझमें रहते हैं करोड़ों लोग चुप कैसे रहूँ,
हर ग़ज़ल अब सल्तनत के नाम एक बयान है।
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वो आदमी नहीं है मुकम्मल बयान है,
माथे पे उसके चोट का गहरा निशान है
सामान कुछ नहीं है, फटेहाल है मगर
झोले में उसके पास कोई संविधान है
उस सिरफिरे को यों नहीं
बहला सकेंगे आप
वो आदमी नया है मगर सावधान है



@ दुष्यंत कुमार