समाजवादी विचार यात्रा हुबली पहुंची

राष्ट्रद्रोह के कानून का दुरुपयोग बंद करे सरकार
नोट बंदी, जी एस टी, धारा 370 हटाए जाने और नागरिकता संशोधन कानून लाने से कारण देश का विकास अवरोधित हुआ है
देश को नागरिकता रजिस्टर की नहीं, बेरोज़गारों के रजिस्टर की ज़रूरत है


30 जनवरी को गांधी स्मृति, दिल्ली से निकली भारत यात्रा की तेइसवें दिन की शुरुआत हुबली से हुई जहां अश्रफ अली बशीर अहमद के नेतृत्व में अनवर मुढोल (वर्किंग प्रेजिडेंट,  सुरक्षा समिति), सैय्यद ताजुदीन खादिम असरफ अली, शंकर हलगट्टी, पीताम्बरा, बी आर पाटिल, नागराज गुरिकर, लक्ष्मण बाकाजी, दोनप्पा कब्बर, प्रोफेसर आई जी सनादी, कालेबुद्दे इस्माइल, महेश पत्तर, श्रिशाइल कमाटर  ने यात्रियों का स्वागत किया तथा प्रेस वार्ता को  संबोधित किया।
प्रेस को संबोधित करते हुए डॉ. सुनीलम ने कहा कि  मोदी सरकार ने नोटबन्दी, जी एस टी, धारा 370 खत्म कर तथा नागरिकता संशोधन कानून लागू कर देश को आर्थिक मंदी के रास्ते पर धकेल कर दिया है। जहां हर साल 1.5 करोड़ लोग रोज़गार की तलाश में पढ़ लिख कर बेरोज़गारों की लाइन में लग जाते है, वहां पिछले 5 सालों में 3.65 करोड़ लोग, जो रोज़गार में थे, सरकार की नीतियों के कारण बेरोज़गार हो गए हैं। कुल मिलाकर देश के 15 करोड़ लोग बेरोज़गार हो गए हैं जिन्हें रोज़गार की ज़रूरत है, इसलिए देश को नागरिकता रजिस्टर की नहीं, बेरोज़गारों के रजिस्टर की ज़रूरत है जिन्हें 10,000 रुपये प्रति माह रोज़गार भत्ता दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अभी तक 12 राज्य सरकारों ने नागरिकता संशोधन कानून का विरोध किया है। डॉ. सुनीलम ने सरकारों पर राष्ट्रद्रोह के कानून का दुरुपयोग करने का आरोप लगाते हुए कहा कि बीदर के शाहीन स्कूल के 9 साल के बच्चे की माँ नजमुनिस्सा तथा प्राचार्य फरीदा बेगम एवं कोप्पल जिले के कन्नड कवि सिराज बिश्राल्ली पर लगाया गया देशद्रोह का मुकदमा तत्काल वापस लिया जाना चाहिए क्योंकि भारत का संविधान देश के हर नागरिक को स्वतंत्र अभिव्यक्ति का अधिकार देता है जिसमें कविता लिखना, नाटक करना भी शामिल है। डॉ. सुनीलम ने हुबली में भारी बारिश से हुए फसल नुकसान का मुद्दा उठाते हुए कहा कि किसानों को अब तक बीमा नहीं मिला है। सरकार ने जो 10000 करोड़ की घोषणा की थी, वह भी किसानों को अब तक नहीं मिला है। 
सभा को संबोधित करते हुए बी आर पाटिल ने कहा कि आज़ादी के आंदोलन में तथा आज़ादी के बाद अब तक हुए विकास में देश के सभी धर्मों और सभी जातियों के लोगों का योगदान है, जिसे सरकार झुठलाना चाहती है।   
यात्रा के बारे में बताते हुए यात्रा के संयोजक अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि अब तक यात्रा में 90 कार्यक्रम हो चुके हैं जिसमे डेढ़ लाख रुपये का आर्थिक सहयोग लोगों द्वारा दिया गया है। उन्होंने कहा कि पहले चरण की यात्रा 16 राज्यों में होकर 23 मार्च को हैदराबाद में पूरी होगी। जहां डॉ. लोहिया के जन्मदिवस और शहीद भगत सिंह जी के शहादत दिवस के अवसर पर समाजवादी समागम आयोजित किया जाएगा। उन्होंने चुनाव सुधारों की ज़रूरत पर बोलते हुए कहा कि वर्तमान राजनीति पूंजीपतियों के हाथ में चली गयी है जिसे जनता के हाथ में पहुंचाने के किये चुनाव सुधारों की सख्त आवश्यकता  है।
समाजवादी विचार यात्रा के कर्नाटक राज्य संयोजक, अरविंद दलवई ने कहा कि भाजपा के कट्टरवादियों द्वारा अनर्गल बयान दिए जाने के चलते समाज में तनाव और हिंसा फैल रही है जिससे कर्नाटक का विकास बाधित हो रहा है। कर्नाटक राज्य के लोगों को शांतिवादी बताते हुए उन्होंने कहा कि समाज में घृणा और नफरत फैलाने वालों को सामाजिक स्तर पर अलग-थलग किये जाने की ज़रूरत है। 
यात्रियों ने हुबली के दो बार विधायक रहे जब्बार खान से मुलाकात की जिन्होंने कहा कि एन आर सी विरोधी आंदोलन तभी सफल होगा जब नागरिकता कानून से प्रभावित होने वाले दलित, आदिवासी और घुमंतू जातियों के लोग खुलकर कानून के विरोध में सड़कों पर आएंगे। 
इनके अलावा यात्रीगण अधिवक्ता आराधना भार्गव (मध्य प्रदेश), लोकेश भिवानी (हरयाणा), पी जे जोसी (केरल), रोहन गुप्ता (झारखण्ड), बाले भाई (मध्य प्रदेश) और अंजना (उत्तराखण्ड) ने भी अपने विचार रखे। 
समाजवादी समागम 5 वर्षों से चलाई जा रही एक ऐसी प्रक्रिया है जिसका उद्देश्य स्वतंत्रता आन्दोलन, समाजवादी आन्दोलन एवं संवैधानिक मूल्यों की पुर्नस्थापना के साथ-साथ देशभर के समाजवादी, गांधीवादी, सर्वोदयी, वामपंथी, अंबेडकरवादी विचारधारा से जुड़े जन आंदोलनकारियों, मानव अधिकारवादियों, पर्यावरणवादियों एवं सभी लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता में विश्वास रखने वाले संगठनों और व्यक्तियों को स्थानीय स्तर पर आयोजित कार्यक्रमों के माध्यम से एकजुट करना है।