लोकतंत्र का अंतिम क्षण है कह कर आप हँसे- रघुवीर सहाय

फ़िल्म स्टार्स के साथ प्रधानमंत्री की फोटुएँ बासी हो गईं। अब सुप्रीम कोर्ट के जजों के साथ देखिए। और सबके चेहरे की हँसी देखिए। 


जस्टिस चंद्रचूड़ के मुखारविंद को देख रघुवीर सहाय की पंक्तियाँ याद आ गईं-


निर्धन जनता का शोषण है
कह कर आप हँसे
लोकतंत्र का अंतिम क्षण है
कह कर आप हँसे
सबके सब हैं भ्रष्टाचारी
कह कर आप हँसे
चारों ओर बड़ी लाचारी
कह कर आप हँसे
कितने आप सुरक्षित होंगे
मैं सोचने लगा
सहसा मुझे अकेला पा कर
फिर से आप हँसे


मार्फ़त : Pyoli Swatija