राजा के फरमान के बाद अपने ही देश में बिना कोरोना संक्रमण के भूख से मर गए. ये

डिजीटल,दिल्ली। इस तरह के मैसेजों की बाढ़ आ गई है कि मजदूर भले ही मर जाएं, लेकिन उन्‍हें घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए. यह सलाह बहुत उत्‍तम है, बस ऐसा कहने वाले अगले पांच दिन तक खुद और अपने बाल बच्‍चों सहित भूखे रहें. छठवें दिन भी अगर वे भूखे रहने की ‍सिफारिश करें तो पूरे देश को उनकी बात माननी चाहिए.
असल में ऐसे लोगों को भूखा रहने के सलाह देने के बजाय यह सोचना चाहिए कि मजदूर इतना डर क्‍यों गए. उनके पास समय रहते भरोसा और भोजन क्‍यों नहीं पहुंचा. जो अब भी नहीं निकले हैं उनकी क्‍या मदद हो रही है. अफसरों को वेतन अफसरी झाड़ने के लिए नहीं जनता की सेवा के लिए मिलता है. इसलिए अमानवीय बातें करने के बजाय अपने गरीब भाइयों का दुख महसूस कीजिए.
उधर झाँसी से बड़े भाई पत्रकार संतोष पाठक की वाल से यह नीचे लिखा अंश फ़ोटो सहित हूबहू शेयर कर रहा हूँ....😢
ये रणवीर हैं. राजा के फरमान के बाद अपने ही देश में बिना कोरोना संक्रमण के भूख से मर गए. ये देश के दिल दिल्ली में पसीना बहाकर विकास का पहिया घुमा रहे थे, मुसीबत के दौर में दिल्ली ने इसे भगा दिया.ये पैदल ही दिल्ली से मुरैना MP के लिए निकले थे और चलते- चलते मर गए. ऐसे न जाने कितने मजदूर भूख और प्यास के बीच पैदल चलते ज़िन्दगी का रण हार जाएंगे.इंसानियत भूल चुके भक्त कुछ भी तर्क दें, लेकिन सरकार अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकती. चूक तो हुई है..समय रहते सुधार लीजिये !
#पलायन #कोविड19 #लॉकडाउन_21दिन #रणवीर 


सभार @ वरिष्ठ पत्रकार पीयूष बबेले,न्यूज़ 18