जल्दी से जल्दी डिटेंशन सेंटर बनाने का आदेश देने वाले सुप्रीम कोर्ट के जज भी उतरे CAA के खिलाफ

नागरिकता कानून (CAA) के खिलाफ देशभर में हो रहे प्रदर्शनों को आम आदमी का आंदोलन कहा जा सकता है। सड़कों पर उतरे लोगों का न कोई नेता है और न ही कोई संगठन है।इस दौरान कई चर्चित नाम भी सड़कों पर उतरे हैं। इनमें सुप्रीम कोर्ट के पू्र्व न्यायाधीश मदन बी लोकुर भी शामिल हैं।दिलचस्प बात ये है कि लोकुर ही वो न्यायाधीश हैं जिन्होंने असम के गोलपारा में जल्द से जल्द डिटेंशन सेंटर बनाने का आदेश दिया था।दरअसल जस्टिस मदन बी लोकुर का मानना है कि अवैध अप्रवासियों को निकालना अच्छी बात है लेकिन वह सिर्फ असम के लिए था और दूसरा वह धार्मिक भेदभाव के खिलाफ है। लेकिन मोदी सरकार ने नागरिकता संशोधन कानून पास करवा कर एक फिल्टर लगा दिया है।जिससे मुस्लिमो को छोड़कर सबको नागरिकता मिल जाएगी और मुस्लिमो को डिटेंशन सेंटर जाना पड़ेगा। जस्टिस मदन को इस बात पर गुस्सा आ गया और पुरजोर विरोध कर रहे हैं। सब इसे मुस्लिम विरोधी कानून बता रहे है


क्या कहा था लोकुर ने अपने आदेश में?


लोकुर ने 2018 में जेल सुधारों पर स्वतः संज्ञान याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार को डिटेंशन सेंटर बनाने के काम में तेजी लाने का आदेश दिया था।12 सितंबर, 2018 को दिए अपने आदेश में न्यायाधीश लोकुर ने कहा था, “हम लोग इस बात से हैरान नहीं हैं कि किसी भी राज्य ने कोई डिटेंशन सेंटर नहीं बनाया है। दुर्भाग्य से इसमें असम भी शामिल है, जहां बड़ी संख्या में अवैध अप्रवासी और विदेशी नागरिक हैं।


आदेश में अवैध अप्रवासियों के बुनियादी मानवाधिकार सुनिश्चित करने को कहा


सरकार को काम में तेजी लाने का आदेश देते हुए लोकुर ने कहा था, “हम चाहते हैं कि असम में डिटेंशन सेंटर के काम में तेजी लाई जाए क्योंकि भारत सरकार ने इसके लिए 46.51 करोड़ रुपये की राशि पहले ही मंजूर कर दी है।”उन्होंने अपने आदेश में असम सरकार को हिरासत में लिए गए अवैध अप्रवासियों और विदेशी नागरिकों के बुनियादी मानवाधिकार सुनिश्चित करने के लिए भी कहा था।


लोकुर ने कहा, जल्द से जल्द होगा डिटेंशन सेंटर का निर्माण


सुनवाई के दौरान असम सरकार ने सुप्रीम कोर्ट बेंच को गोलपारा में डिटेंशन सेंटर बनाए जाने का फैसला होने के बारे में बताया था, जिस पर न्यायाधीश लोकुर ने कहा था, “हमें उम्मीद है कि असम इसका निर्माण जल्द से जल्द करेगा।”


दिया था 31 अगस्त तक निर्माण कार्य पूरा करने का आदेश


इसके बाद भी न्यायाधीश लोकुर की सुप्रीम कोर्ट बेंच डिटेंशन सेंटर के बारे में लगातार जानकारी मांगती रही।31 अक्टूबर, 2018 को उन्होंने सरकार से निर्माण कार्य और इसके टेंडर के बारे में पूछा, वहीं 2 नवंबर 2018 को इसकी जानकारी मांगी।उन्होंने असम सरकार को 31 अगस्त, 2019 तक इस डिटेंशन सेंटर का निर्माण कार्य पूरा करने का आदेश दिया था। उन्होंने गुवाहाटी जेल परिसर को डिटेंशन सेंटर में बदलने के बारे में भी पूछा था।


कौन हैं मदन बी ठाकुर?


दिसंबर 2018 में सुप्रीम कोर्ट से रिटायर होने वाले न्यायाधीश लोकुर अभी फिजी की सुप्रीम कोर्ट में गैर-नागरिक न्यायाधीश हैं।वह इस पद पर नियुक्त होने वाले भारतीय सुप्रीम कोर्ट के पहले न्यायाधीश हैं।इससे पहले वो गुवाहाटी हाई कोर्ट और आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश भी रह चुके हैं। लाकुर राष्ट्रमंडल मानवाधिकार पहल (CHRI) के सदस्य भी हैं जिसने हाल ही में असम में “विदेशियों” के डिटेंशन पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी की आलोचना की थी।


गोलपारा में बन रहा है देश का पहला स्थाई डिटेंशन सेंटर


बता दें कि असम के गोलपारा में देश का पहला स्थाई डिटेंशन सेंटर बनाया जा रहा है जिसका निर्माण कार्य इस महीने पूरा होने की उम्मीद है।सात फुटबॉल स्टेडियम के बराबर बड़े 2,88,000 स्क्वेयर फीट के इस डिटेंशन सेंटर में 15 चार मंजिला इमारत होंगी और इसमें 3,000 लोग रह सकेंगे। इसे बनाने में कुल 46 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं।असम में ऐसे 10 स्थाई डिटेंशन सेंटर बनाए जाने हैं।