समाजवादी विचार यात्रा विल्लुपुरम पहुंची

सिर्फ कानून महिलाओं की रक्षा नहीं कर सकता है, सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक धारणाओं को बदलना होगा 


समाजवादी समागम रायपुर शाहीन बाग़ के आंदोलनकारियों को ज़बरदस्ती हटाने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार की निंदा करता है


30 जनवरी को गांधी स्मृति, दिल्ली से निकली भारत जोड़ो - संविधान बचाओ समाजवादी विचार यात्रा, 35वें दिन विल्लुपुरम पहुंची जहां अधिवक्ता पी ए लूसिया, इललई अरसन, वीरप्पन, ए एस शफीक अहमद, एस मोहम्मद राठी, के चनसाशा, एम मुस्तकदीन, थामिलेन्थि और अधिवक्ता ज़ावीर ने यात्रियों का स्वागत किया।


कलेक्टरेट ऑफिस, पुराना बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन के बाहर नुक्कड़ सभाएं हुई और थाका स्ट्रीट में बैठक का आयोजन किया गया। 


सभाओं को संबोधित करते हुए अधिवक्ता लूसिया ने कहा की पुरुषवादी सामंती रवैये को समाज से खदेड़ने की ज़रूरत है और महिलाओं का सशक्तिकरण घर और शिक्षा संस्थाओं से शुरू होना चाहिए। सिर्फ कानून महिलाओं की रक्षा नहीं कर सकता है, सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक धारणाओं को बदलना होगा और शिक्षा संस्थाओं में मार्शल आर्ट्स के द्वारा महिला सशक्तिकरण कराने का काम होना चाहिए। उन्होंने बताया की उत्तर में महिलाओं की हालत पश्चिम से ज़्यादा बुरी है क्योंकि पेरियार और अम्बेडकर की सीख ने तमिल नाडू के महिलाओं को पुरुषवादी समाज के बंधनों से बाहर आकर अपने लिए एक नई पहचान बनाने की प्रेरणा दी। अत्तराल आंदोलन की संयोजक, लूसिया जी ने बताया की आमतौर पर सिर्फ 5 से 6 प्रतिशत बलात्कार के मामलों में अपराधियों को सज़ा होती है लेकिन अत्तराल ने जो 150 केस में काम किया, उसमे दोगुने प्रतिशत अपराधियों को सज़ा मिली। अत्तराल ने थेनेरकुन्द्रम गांव के 9 साल की कोकिला और 7 साल की आराधना का रेप का भी केस लड़ा था जिसमे उनके 15 रिश्तेदारों ने 2 साल तक उनका रेप किया था। बाद में साधना की मौत भी हो गयी। 


सभाओं को संबोधित करते हुए डॉ सुनीलम ने कहा की कल ही संयुक्त राष्ट्र के मानव अधिकार कमिशनर ने घोषणा की कि वे भारत के सर्वोच्च न्यायालय में चल रहे नागरिक्ता संशोधन कानून के मामले में खुद को एमिकस क्यूरी के रूप में नियुक्त कराने के लिए आवेदन देंगे, देश के राजनयिक इतिहास में ऐसा कभी नही हुआ है। हाल ही में ईरान के विदेश मंत्री जावद ज़रीफ़ ने भारत में हो रहे मुस्लिम के खिलाफ हिंसा की निंदा की और मोदी सरकार को कहा की वे मुसलमानों के खिलाफ हिंसा बंद करें। पूरी दुनिया में विख्यात संयुक्त राष्ट्र और भारत का पुराना साथी, ईरान के तरफ से यह बयान बताते है की मोदी सरकार ने अपने करतूतों से भारत देश का नाम डुबो दिया है। डॉ सुनीलम ने रायपुर शाहीन बाग़ के आंदोलनकारियों को ज़बरदस्ती हटाने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार की निंदा की। उन्होंने कहा की मोदी सरकार ने नोटबन्दी, जी एस टी, धारा 370 खत्म कर तथा नागरिकता संशोधन कानून लागू कर देश को आर्थिक मंदी के रास्ते पर धकेल कर दिया है। जहां हर साल 1.5 करोड़ लोग रोज़गार की तलाश में पढ़ लिख कर बेरोज़गारों की लाइन में लग जाते है, वहां पिछले 5 सालों में 3.65 करोड़ लोग, जो रोज़गार में थे, सरकार की नीतियों के कारण बेरोज़गार हो गए है। कुल मिलाकर देश के 15 करोड़ लोग बेरोज़गार हो गए है जिन्हें रोज़गार की ज़रूरत है, इसलिए देश को नागरिकता रजिस्टर की नही, बेरोज़गारों के रजिस्टर की ज़रूरत है जिन्हें 10,000 रुपये प्रति माह रोज़गार भत्ता दिया जाना चाहिए। 


अधिवक्ता आराधना भार्गव ने यात्रा के अनुभव बताते हुए कहा की जहां भी वे गए, उन्होंने पाया की सरकार कल्याणकारी योजनाओं  के बजट  में कटौती कर रही है। कहीं सरकारी स्कूल बंद कर रही है तो कहीं सरकारी अस्पताल ,सरकार देश अडानी अम्बानी को सौंपना चाहती है लेकिन  देश को  मेहनतकश किसानो मजदूरों ने  बनाया है।


गांधीजी की 150वीं जयंती और समाजवादी आंदोलन के 85 वर्ष पूरा होने के अवसर पर स्वतंत्रता आन्दोलन, समाजवादी आन्दोलन के मूल्यों की पुनर्स्थापना तथा संवैधानिक मूल्यों की स्थापना हेतु यह यात्रा निकाली है। अब तक यात्रा में 9 राज्यों में 119 कार्यक्रम हो चुके हैं। पहले चरण की यात्रा 16 राज्यों में होकर 23 मार्च को हैदराबाद में पूरी होगी जहां डॉ. लोहिया के जन्मदिवस और शहीद भगत सिंह जी के शहादत दिवस के अवसर पर समाजवादी समागम आयोजित किया जाएगा। 


इनके अलावा यात्रीगण तमिल सिल्वी (तमिल नाडू), मनिदास (पॉन्डिचेरी), रोहन गुप्ता (झारखण्ड), बाले भाई (मध्य प्रदेश),  शामिल हुए।


यात्रा का आयोजन  समाजवादी समागम द्वारा किया गया है , जिसका उद्देश्य स्वतंत्रता आन्दोलन, समाजवादी आन्दोलन एवं संवैधानिक मूल्यों की पुर्नस्थापना के साथ-साथ देशभर के समाजवादी, गांधीवादी, सर्वोदयी, वामपंथी, अंबेडकरवादी विचारधारा से जुड़े जन आंदोलनकारियों, मानव अधिकारवादियों, पर्यावरणवादियों एवं सभी लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता में विश्वास रखने वाले संगठनों और व्यक्तियों को स्थानीय स्तर पर आयोजित कार्यक्रमों के माध्यम से एकजुट करना है।