लॉकडाउन में फंसे उत्तराखंड के लोगों को उनके सांसदों विधायकों एवं मुख्यमंत्री ने मदद की अपील के बाद भी कोई सुध नही ली

लॉकडाउन की चलते देश के विभिन्न राज्यों सहित उत्तराखंड के लोग भी बड़ी संख्या में दिल्ली में फंसे पड़े हैं जहां एक और राज्य के मुख्यमंत्री हेल्पलाइन नंबर जारी कर उन्हें हर संभव मदद करने की अपील कर रहे हैं यह अपील उस समय नाकाफी हो जाती है जब इन नंबरों पर फोन लगाने पर कोई भी व्यक्ति जिसे राज्य शासन ने यह जिम्मेदारी सौंपी है फोन पर उपस्थित नहीं होता है आखिर अपने प्रदेश के लोगों के साथ यह छलावा कैसा? जिन मतदाताओं के बल पर ये  सत्ता पर काबिज  हुए हैं वही सत्ताधीश इनकी अब कोई भी सुध नही ले रहे है आखिर अपने प्रदेश की जनता से ऐसी बेरुखी इस मुसीबत के वक्त क्यो? उत्तराखंड के यह लोग अपने प्रदेश के विधायक मुख्यमंत्री एवं सांसदों समेत उन सभी राजनीति वालों से अपील कर चुके हैं कि उन्हें किसी तरह अपने राज्य वापस पहुंचाने के प्रबंध किए जावे परंतु उन्हें किसी भी तरह की मदद मिलना तो दूर उनके साथ किया जा रहा या उपेक्षा पूर्ण व्यवहार इस बात की गवाही दे रहा है कि आखिर उन्होंने कैसे निकम्मे  जनप्रतिनिधियों को चुना है जो आपदा के इस दौर में दुबक कर बैठ गए मुसीबत में फंसी इन लोगों का निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के ऊपर गुस्सा होना निश्चित तौर पर वाजिब है जब आस लगाए बैठे लोग बहुत  प्रयत्न करने के बाद भी कोई प्रतिउत्तर नहीं पाते हैं कुल मिलाकर इन बेबस लोगों की मदद के लिए राज्य सरकारों का हाथ आगे नहीं आना यह दर्शाता है कि राज्य की सत्ता कितनी निकम्मी है उत्तराखंड के लोगों ने मुसीबत में फंसे अपने साथियों की सूची सोशल मीडिया पर जारी कर मदद की गुहार लगाई है उत्तराखंड के इन लोगों को सरकार द्वारा सांसदों को दिए गए बड़े-बड़े आलीशान शासकीय आवासों में रहने की व्यवस्था इन के स्थानीय सांसद और राज्य के मुख्यमंत्री कर सकते थे परंतु ऐसा कुछ भी न होने की दशा में इन लोगों के पास उम्मीद की आखिरी किरण भी अब समाप्त हो रही है