जहांपनाह, आपके मुख्य न्यायाधीश के सामने मेरी औकात बहुत थोडी है

बादशाह सलामत,
आपके गुलाम मुझसे मेरी औकात
पुछने की हिमाकत करते है
बताना तो नही चाहता लेकिन
क्या करूं मजबूर कर देते हैं


वजीरे आलम
आपके वजीर के सामने
मेरी औकात बहुत थोडी है
बस इतनी सी
कि वह मेरे खिलाफ झुठे सबुत
गढवा सकता है
खुद देश निकाला काटकर भी
आपके तख्त के बगल में बैठकर
रियाया के खिलाफ षडयंत्र रच सकता है
और मैं केवल उसकी गुप्त सेना के
अगुआ की आंखो में आंखे डाल कर 
मेरे गुनाहों के सबुत की
सच्चाई पुछ सकता हूं


जहांपनाह,
आपके मुख्य न्यायाधीश के सामने
मेरी औकात बहुत थोडी है
बस इतनी सी
कि वह सभी सबुतों गवाहों को नकार कर
मुझे जो चाहे सजा दे सकते है
और मै सरे दरबार में 
केवल उनके मुंह पर थूंक सकता हूं
उनकी हैसियत इतनी बडी
कि दरबार की छोटी सी कुर्सी के लिये
वे आसानी से सस्ते मे बिक जाते है
और मेरी औकात बस इतनी सी
कि मुझ अदने को कोई माई का लाल
न खरीद सका है न खरीद सकता हैं


मेरे सरकार
आपके सामने मेरी औकात 
बहुत थोडी है
बस इतनी सी
कि आप अपने मालिकों से डरते है
और वे उनके मालिक से
आप के मालिक मुझसे डरते है
और उनका मालिक तो मुझे
केवल सपने में देखकर
बिस्तर गीला कर देता हैं
दुनिया जानती है कि
आपने रियासत में दिवार 
इसीलिए खडी कर दी थी
कि आपके महा मालिक को
मैं दिखाई न दूं


महासल्तनत के महासुलतान,
आपकी हैसियत इतनी बडी है
और मेरी औकात बस इतनी सी
कि आप फन फैलाए सांप है 
और मैं अदनी सी चिंटी
मेरी औकात बस इतनी सी है
मेरे सरकार
                        - विरा साथीदार