गोगोई शायद भारत के इतिहास में पहले ही न्यायाधीश है जिसनें अपनें खुद पर आरोप लगे हुये मामले में खुद  ही बेंच बनाकर अपने आप को उसमे शामिल किया हो  

आनंद तेलतुंबडेके बहाने से याद आया की सेवा ग्राम में दो साल पहले के प्रजासत्ताक दिवसको एक बुजुर्गके सामने  कनैह्या नामके कीसी और युवा का नाम पुकारा तो वे अचानक बोल पड़े ओ देशद्रोही  ! अभी कुछ दिन पहले मैंने आवाज इंडिया टीवी पर गोगोई के राज्य सभा के मनोनीत करने को लेकर मेरे साक्षात्कार को देखनेके बाद सबेरे सबेरे एक अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के कार्यकर्ताका फोन आया और बोला की आप देशद्रोहियोंमेसे एक हो !
         केंद्र में वर्तमान सरकार आनेके बाद यह जुमला जादा चलनमे आया है जो भी कोई सरकार कीं आलोचना करते हैं उन्हें यह बोला जा रहा है  ! क्या आजादी के बाद इतनी सरकारें आई और उन्हें डॉ लोहीया, इंद्रजित गुप्ताजी, अटलजी,अडवाणीजी, फर्नांडीज, दंडवते,नाथ पै,और वर्तमान सरकार में शामिल प्रधानमंत्री से लेकर सभी मंत्रीयोने भी सत्ताधारी दल की आलोचना की है यह भी देशद्रोही वालीं बातें थी  ? 
            आजकल बहुत ही सुविधाजनक ढंग से इस जुमले का प्रयोग किया जा रहा है  ! गोगोई शायद भारत के इतिहास में पहले ही न्यायाधीश है जिसनें अपनें खुद पर आरोप लगे हुये मामले में खुद  ही बेंच बनाकर अपने आप को उसमे शामिल किया हो  ! और इस आदमी ने आरोप लगाने वाली महिला कर्मचारी को सजा देने का काम किया है  ! मेरी पत्नी केंद्रिय विद्यालयकी प्राचार्या थी तो बोर्ड के परीक्षा के पहले एक पत्र आता था की यदि इस परीक्षा में आपके नाते रिस्तेदार में से कोई परीक्षा दे रहा हो तो आप यह जिम्मेदारी किसि दुसरे को सोपै ! 
            शायद हमारी जुडिशियल सिस्टम में भी यही नियम होंगें की यदि आप या आपका कोई भी रिश्ता वाले मामले में आप यह जिम्मेदारी कीसी और को सौंपना यह बात गोगोई और उनके साथ काम करने वाले दुसरे जजको भी पता होंते हुए कैसे चलीं? और वह भी एक महिला उत्पीड़न के मामले में  ! और इसी तरह राफेलके केसकी जो हमारे राष्ट्र के सुरक्षा से संबंधित मामलों की केस रहते हुए सरकार एक बंद लिफाफे को गोगोई साहब को अलग से देकर पुरा मामला रफा-दफा कर दिया उसी तरह कश्मीर के 370 हटाने की किसकी आजतक सुनवाई नहीं हुई और सबसे संवेदनशील और विवादित बाबरी मस्जिद के मामले में हमारे देश के संविधान की अनदेखी कर के कुछ खांस लोगोको खुष करने के लिए दिया गया जज्मेंट हैं और तथाकथित नागरिकता का मामला 80 सेभी अधिक केसेस के बावजूद मामला टालते जा रहा है और इस आदमी को रिटायर होने के तीन महीनों के भीतर राज्य सभा में मनोनीत करने की बात पर मैंने आलोचना करने की कोशिश की है तो अंधश्रद्धा निर्मूलन समितिमे काम करने वाले मित्र को मैं देशद्रोही नजर आ रहा हूँ  ! अब इस अंधे को क्या करें  ? 
              इसलिए आनंद तेलतुंबडे पर जो देशद्रोह का मुकदमा दर्ज किया गया है और उसे तीन हप्तेभरमे सरेंडर करने के लिए कहा गया है यह बात भी सही नहीं ठहराया जा सकती है क्योंकि मैं आनंद को काफी समय से जानता हूँ वह मार्क्सवादी विचारो के है मेरे उनके कुछ वैचारिक मतभेद है लेकिन वह देशद्रोही है यह बात ठीक नहीं है और वे इस देश से उतना ही प्यार करते हैं जितना कोई अन्य इसलिये मुझे लगता है कि देशद्रोही कीं बात आज कल जो भी वर्तमान समय की सरकार कीं गलतीयोको लेकर आलोचना करते हैं उन्हें देशद्रोही कहना ठीक नहीं है  और कम-से-कम वर्तमान समय की सरकार और उसके समर्थन करने वाले लोगों को मेरा कहना है कि जो लोग आजादी के आंदोलन से दूर रहें और 135 करोड़ आबादी वाले देश में धर्म के नाम पर राजनीति करने वालों को मैं देशको तोडने वाले लोग कहुँगा कयोंकि दुनिया में जितने भी धर्म हैं उन्हें मानने वाले लोग इस देश में रहते हैं और ऐसे देश में किसी खास धर्म कीं बात करने का अर्थ अलगाववादी ताकतों को बढ़ावा देना  ! हमारे देश को एक सूत्र में पिरोकर विदेशी साम्राज्य का अंत करने वाले सभी राष्ट्रीय नेता जिनमें से महात्मा गाँधी, नेहरु, सरदार पटेल,मौलाना आजाद, और न जाने कितने अनगिनत लोगों की शहादत पर यह देश आजाद हुआ और उसे एक राष्ट्र के रूप मे शक्ल दीये उस देश में सांप्रदायिक राजनीति करना सबसे बड़ा देशद्रोह है कयोंकि किसी खास धर्म के नाम पर राजनीति करने से अन्य धर्मों के लोगों को असुरक्षित महसूस करने से बडी मेहनत से इस देश की एकता और अखंडता पर प्रहार करना ही राष्ट्र-द्रोही काम है और वर्तमान सत्ताधारी दल के लोग यह काम लगातार कर रहे हैं  ! 
           दलित, आदिवासी, अल्पसंख्यक समुदाय और महिलाओं की अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे उनके साथ काम करनेवाले कुछ प्रमुख साथियोकौ गत कुछ दिनों से लगातार नक्षलवादी या मुसलमान है तो आतंकवादी बोलकर जानबूझकर लोगोमे भ्रम पैदा करने की कोशिश की जा रही है जिसे तुरंत बंद कर के गलत मुकदमे हटानेकी कारवाई करने के लिए विशेष अनुरोध करता हूँ


सुरेश खैरनार


लेखक प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता एवं राष्ट्र सेवा दल के पूर्व अध्यक्ष है