यहां रोशनी बहुत तेज है।


भारत कोकिला' के नाम से प्रसिद्ध स्वाधीनता संग्राम की एक अप्रतिम योद्धा स्वर्गीया सरोजनी नायडू अपनी सांगठनिक क्षमता, ओजपूर्ण वाणी और देश की आज़ादी के लिए अपने प्रयासों की वज़ह से अपने दौर की सर्वाधिक लोकप्रिय महिला रही है। वे आज़ादी से पूर्व कांग्रेस की अध्यक्ष भी रहीं और आज़ादी के तुरंत बाद उत्तर प्रदेश की राज्यपाल भी बनीं। कहते हैं कि देश की राजनीति में उनके जैसी खनकती, मधुर और भावपूर्ण आवाज़ फिर नहीं सुनी गई। वैसे उनके जीवन का एक लगभग ओझल पक्ष भी रहा है। बहुत कम लोगों को पता है कि वे तेलगू, हिंदी अंग्रेजी, बंगला, गुजराती भाषाओं की जानकार होने के अलावा पिता अघोरनाथ चट्टोपाध्याय और मां वरदा सुन्दरी की तरह अपने समय की एक विख्यात कवयित्री भी थीं जिनकी कविताओं के अनुवाद देश-दुनिया की कई भाषाओं में हुए हैं। बीसवीं सदी के आरम्भ में प्रकाशित उनके तीन कविता संकलन - 'द गोल्डन थ्रेसहोल्ड', 'बर्ड ऑफ टाइम' तथा 'ब्रोकन विंग' ने अपने दौर में बड़ी लोकप्रियता अर्जित की थी। राजनीति नहीं, प्रेम का उल्लास और व्यथा उनकी कविताओं के मुख्य स्वर हैं। सरोजनी नायडू की जयंती (13 फरवरी) पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि, मेरे द्वारा अंग्रेजी से अनुदित उनकी एक प्यारी कविता के साथ !



ओ मेरे प्यार
मूंद दो अथाह आनंद से थकी
और बुझी मेरी आंखों को
यहां रोशनी बहुत तेज है


खामोश कर दो
गीत गाते-गाते थक चुके
मेरे अधरों को
अपने एक बहुत गहरे चुंबन से


बारिश में भींगे
गीले फूल की तरह
वेदना और बोझ से झुकी
मेरी आत्मा को
कहां पनाह मिलेगा
अगर सामने तेरा चेहरा न हो !


Dhruv Gupt