महाशिवरात्रि के नाम पर ठगी करने वाले गुरुओं को सबक़ मिले।

हे शंकर, 
बग़ैर ध्यान किए, मानव कल्याण हेतु कर्म किए बिना बिस्तर पर बैठे बैठे व्हाट्स एप जगत में शिव रात्रि मीम ठेलने वाले आलसी महामूरख प्राणियों का उद्धार करें। हर बात के जवाब में गाली देने वाले प्राणियों को सत्य का मार्ग दिखाएं। प्रेम से भर दें। राजकर्म को लीला में बदल कर लोक को ठगने वाले राजनेताओें को बुद्धि और विनम्रता दें। ऐश्वर्य का अहंकार चूर हो, ऐसा कोई शस्त्र चलाएँ। ग़रीब जनता के सामने दीवार खड़ी कर मानवता का अपमान न हो ऐसी लोकसंस्कृति दें। हम सभी को अपनी बारात में शामिल करें। जहां कोई भेदभाव न हो। किसी के लिए छोटी कुर्सी न हो। किसी के लिए ऊँची कुर्सी न हो। जीवन का एक ही पहाड़ हो। मन्दराचल हर तरफ़ हो। मूर्खता और हिंसा का अस्ताचल हो। आनंद आनंद हो।


हे शिव प्रिया गौरी, 


महादेव से आग्रह है कि भारत भूमि पर हो रही नफ़रत की तामसी राजनीति का अंत हो। 


महाशिवरात्रि के नाम पर ठगी करने वाले गुरुओं को सबक़ मिले। ऐसे गुरु सद्गति को प्राप्त हों। सत्ता के बल पर शिव की महिमा खड़ी करने का दुस्साहस जिसने भी किया है उसे गेंदे के फूल में बदल कर किसी ग़रीब के गले में माला बना कर डालें। प्रेम के लिए भारत भूमि पर तपोवन की स्थापना हो। प्रेम में ख़लल डालने वाले हुडदंगियों को गौरी का श्राप मिले। 


प्रस्थान प्रस्थान। यही स्थान है जीवन का। धरती पर सरहदों का स्थान न हो। 


हे आदिदेव, 


आरंभ हो। आरंभ हो।


@ Ravish Kumar रविशकुमार