जबकि प्रेम तो एकदम  सरल रेखा-सा है -प्रमोद बेड़िया 

सरल रेखा 


तुम आर-पार की लड़ाई लड़ना 
चाहती थी ,तुम चाहती थी 
कि मैं बता दूँ साफ-साफ 
मैं प्रेम करता हूँ कि नहीं 
मैं सच ही प्रेम करता हूँ 
इत्यादि


इतने जटिल सवालों के जवाब 
इतनी सरलता से कैसे 
दिए जा सकते हैं 
जबकि प्रेम तो एकदम 
सरल रेखा-सा है 
जरा-सा भी टेढ़ी हुए बिन 
तुम उस पर चल पाओगी


तुम चल कर देखो 
टेढ़ी होते ही 
गिरने लगोगी ॥


प्रमोद बेड़िया