हे महादेव

 


तुम्हारा देश जल रहा है, 
तुम्हारी गंगा मजबूर सी खड़ी है
धार्मिक-राजनीति के नारे हावी हो चुके हैं,
तुम्हारे जयकारों पे
तुम्हारा काशी नत मस्तक हो चुका है, 
एक नये-नये गढे खुदा के सामने
पार्वतियां सडकों पर सिसक रही हैं 
और शुंभ-निशुंभ संसद में अट्टाहस भर रहे हैं


तुम्हारे भक्त अब मिस्डकाल देकर,
किसी और के भक्त बन चुके हैं
तम्हारे नाम पर नशेडी खुद को तुम्हारा वारिस
और तुम्हारे योग को अपना प्रोडक्ट बताने लगे हैं


महादेव तुम्हारा ये भक्त 
जो तुम्हारी धरती मे जनमा
जिसके रक्त में मां का दूध कम 
और गंगा का पानी ज्यादा बहता है
आज बाट जोह रहा है
तुम्हारे तांडव की


उसने सुन रखा है कि आज
यानि महाशिवरात्रि की रात
तुम तांडव करते हो


और ये भी सुना है
कि तांडव के बाद
छल-कपट-अधम की जगह स्थापना होती है
सत्यम-शिवम- सुन्दरम की


हे महादेव
और कब तक तुम्हारा देश जलेगा?
कब तक मजबूर रहेगी तुम्हारी गंगा?
कब दोगे इस धरती को मुक्ति?


अब तांडव चाहिये
भयंकर तांडव 
महाकाल का तांडव - हैदर रिज्वी