आदिवासियों ने अपने ऊपर होने वाले अत्याचारों के खिलाफ रैली करी

आज  अरनपुर गांव के समीप   आदिवासी जमा हुए और उन्होंने एक रैली की


रैली इस बात के लिए थी कि पोटाली नाम के गांव में पुराने एसपीओ का नाम बदलकर डीआरजी रख दिया गया है और उन्हें बंदूके दे दी गई है


यह डीआरजी के सिपाही आदिवासियों के घरों में घुसकर लूटपाट करते हैं और मारपीट करते हैं


ग्रामीणों ने एक प्रेस कांफ्रेंस भी की थी कई बार पुलिस और प्रशासन को चिट्टियां लिखीं


पुलिस जनता की आंखों में धूल झोंकने के लिए आदिवासियों की हितैषी बनने का नाटक करती है और उन्हें कंबल या चावल का पैकेट बंदूक के दम पर देती है और फोटो खींचकर अखबारों में छपवाती है और कहती है कि देखो पुलिस कितनी अच्छी है वह आदिवासियों की सेवा कर रही है


लेकिन आज जब आदिवासियों ने अपने ऊपर होने वाले अत्याचारों के खिलाफ रैली करी तो अरनपुर थाने के सामने आदिवासियों से भरे हुए तीन ट्रैक्टर पुलिस ने रोक लिए और अरनपुर थाने के थानेदार ने आदिवासियों को पीटा और उन्हें बुरी बुरी गालियां दी तथा रैली में शामिल नहीं होने दिया


आदिवासियों ने फैसला किया है कि वे पुलिस के द्वारा जबरदस्ती दिखावे के लिए दी गई सारी चीजें कलेक्टर ऑफिस के सामने आकर सत्याग्रह करके वापस करेंगे और पुलिस दमन के खिलाफ अपना सत्याग्रह जारी रखेंगे


लेकिन मेरी एक नेक सलाह पुलिस को और प्रशासन को यह है कि अगर आप सोचते हैं कि आप मारपीट कर आदिवासियों को डराकर इस इलाके में शांति ले आएंगे तो यह आपका वहम है


इससे पहले भी बहुत सारे लोगों ने दमन के द्वारा शांति लाने की कोशिश करी लेकिन वह सब असफल हो गए 


दमन से अशांति बढ़ती है, सलाह मान लीजिए आदिवासियों पर अत्याचार बंद कर दीजिए